उत्तर प्रदेश

बांकेबिहारी मंदिर चढ़ावे पर SC का फैसला सेवायतों को लगा बड़ा झटका

nidhi
27 Aug 2026 9:04 AM IST
बांकेबिहारी मंदिर चढ़ावे पर SC का फैसला सेवायतों को लगा बड़ा झटका
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चढ़ावे की पाई पाई का होगा हिसाब सेवायतों की बढ़ी चिंता

मथुरा : वृंदावन के प्रसिद्ध ठाकुर श्री बांकेबिहारी मंदिर में चढ़ावे को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सेवायतों को बड़ा झटका लगा है। मंदिर में आने वाली भेंट और चढ़ावे की व्यवस्था को लेकर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ किया है कि श्रद्धालुओं द्वारा दिया गया दान सीधे मंदिर के कोष में जमा होना चाहिए। इससे वर्षों से चली आ रही जगमोहन भेंट की परंपरा पर भी असर पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मंदिर में आने वाली दान राशि का पूरा हिसाब रखा जाए और इसे दान पेटियों या अधिकृत माध्यमों से सीधे मंदिर खाते में जमा किया जाए। अदालत का कहना है कि श्रद्धालुओं की ओर से भगवान को अर्पित की गई राशि पर पहला अधिकार भगवान का है, इसे कोई व्यक्तिगत रूप से अपने पास नहीं रख सकता।

जगमोहन भेंट की पुरानी व्यवस्था पर रोक
बांकेबिहारी मंदिर में लंबे समय से सेवायतों द्वारा जगमोहन क्षेत्र में श्रद्धालुओं से मिलने वाली भेंट को लेकर परंपरा चली आ रही थी। सेवायतों का मानना था कि यह व्यवस्था मंदिर की पुरानी परंपराओं का हिस्सा है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के नए निर्देश के बाद अब इस तरह की भेंट सीधे मंदिर कोष में जमा होगी। सेवायतों का कहना है कि इस फैसले से उनकी पारंपरिक आय प्रभावित होगी। उनका तर्क है कि मंदिर की सेवा व्यवस्था, पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक जिम्मेदारियों से जुड़े खर्चों में यह आय महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी।
पारदर्शिता पर सुप्रीम कोर्ट का जोर
सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर की प्रबंध समिति को चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि दान राशि के संग्रह और उपयोग में किसी भी तरह की अनियमितता की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर से जुड़े सेवायत, पुजारी या कोई अन्य व्यक्ति दान राशि को सीधे अपने पास नहीं रख सकता। यदि किसी को नियमों के अनुसार कोई हिस्सा या भुगतान मिलना है तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत होगा।
सेवायतों के सामने आर्थिक चुनौती
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सेवायत समुदाय में चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि सदियों से चली आ रही परंपरा में अचानक बदलाव से उनकी आजीविका पर असर पड़ेगा। कई सेवायत परिवार मंदिर सेवा से जुड़े हैं और उनकी आर्थिक व्यवस्था भी इसी से जुड़ी रही है। हालांकि, मंदिर व्यवस्था से जुड़े लोगों का कहना है कि श्रद्धालुओं के चढ़ावे का सही उपयोग और पारदर्शिता जरूरी है, ताकि भक्तों की आस्था बनी रहे और मंदिर की व्यवस्थाएं बेहतर तरीके से संचालित हो सकें।
मंदिर प्रबंधन में आएगा बदलाव
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब मंदिर में दान और चढ़ावे की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। प्रबंधन समिति को ऐसी व्यवस्था तैयार करनी होगी, जिससे हर राशि का रिकॉर्ड रखा जा सके और श्रद्धालुओं को भी भरोसा मिले। बांकेबिहारी मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध कृष्ण मंदिरों में से एक है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में चढ़ावे की पारदर्शी व्यवस्था को लेकर यह फैसला धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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